टोपी सिर पर रख कर जब हम अकड़ने लगते हैं, जरा देर के लिए किसी सवारी पर बैठ कर जब हम आकाश में उड़ने लगते हैं, तो इतनी बड़ी विभूति पा कर क्यों न उसका दिमाग आसमान पर चढ़े? बोला - भोला ऐसा भलामानस नहीं है महाराज! नगद गिनाए, पूरे चौकस।
अपने महाजन के सामने यह डींग मार कर होरी ने नादानी तो की थी, पर दातादीन के मुख पर असंतोष का कोई चिह्न न दिखाई दिया। इस कथन में कितना सत्य है, यह उनकी उन बुझी आँखों से छिपा न रह सका, जिनमें ज्योति की जगह अनुभव छिपा बैठा था।
प्रसन्न हो कर बोले - कोई हरज नहीं बेटा, कोई हरज नहीं। भगवान सब कल्याण करेंगे। पाँच सेर दूध है इसमें, बच्चे के लिए छोड़ कर।
धनिया ने तुरंत टोका - अरे नहीं महाराज, इतना दूध कहाँ। बुढ़िया तो हो गई है। फिर यहाँ रातिब कहाँ धरा है।
दातादीन ने
जानती हैं। लौंडे कहीं फड़ पर जमे होंगे। सब-के-सब आलसी हैं, कामचोर। जब तक जीता हूँ, इनके पीछे मरता हूँ। मर जाऊँगा, तो आप सिर पर हाथ धर कर रोएँगे। लड़की भी वैसी ही। छोटा-सा अढ़ौना भी करेगी, तो भुन-भुना कर। मैं तो सह लेता हूँ, खसम थोड़े ही सहेगा।
झुनिया एक हाथ में भरी हुई चिलम, दूसरे में रस का लोटा लिए बड़ी फुर्ती से आ पहुँची। फिर रस्सी और कलसा ले कर पानी भरने चली। गोबर ने उसके हाथ से कलसा लेने के लिए हाथ बढ़ा कर झेंपते हुए कहा - तुम रहने दो, मैं भरे लाता हूँ।