और तुम्हें न आना पड़ेगा। मैं और गोबर एक-एक खाँचा ले कर तुम्हारे साथ ही चलते हैं।
भोला स्तंभित हो गया। होरी उसे अपना भाई, बल्कि उससे भी निकट जान पड़ा। उसे अपने भीतर एक ऐसी तृप्ति का अनुभव हुआ, जिसने मानों उसके संपूर्ण जीवन को हरा कर दिया।
तीनों भूसा ले कर चले, तो राह में बातें होने लगीं।
भोला ने पूछा - दसहरा आ रहा है, मालिकों के द्वार पर तो बड़ी धूमधाम होगी?
'हाँ, तंबू-सामियाना गड़ गया है। अबकी लीला में मैं भी काम करूँगा रायसाहब ने कहा है, तुम्हें राजा जनक का माली बनना पड़ेगा।'
'मालिक तुमसे बहुत खुश हैं।'
'उनकी दया है।'
एक क्षण के बाद भोला ने फिर पूछा - सगुन करने के लिए रुपए का कुछ जुगाड़ कर लिया है? माली बन जाने से तो गला न छूटेगा।
होरी ने मुँह का पसीना पोंछ कर कहा - उसी की चिंता तो मारे डालती है दादा
से अपने प्रजा पर आतंक जमाना ही हमारा उद्यम है। पिछलगुओं की खुशामदों ने हमें इतना अभिमानी और तुनकमिजाज बना दिया है कि हममें शील, विनय और सेवा का लोप हो गया है। मैं तो कभी-कभी सोचता हूँ कि अगर सरकार हमारे इलाके छीन कर हमें अपने रोजी के लिए मेहनत करना सिखा दे, तो हमारे साथ महान उपकार करे, और यह तो निश्चय है कि अब सरकार भी हमारी रक्षा न करेगी। हमसे अब उसका कोई स्वार्थ नहीं निकलता। लक्षण कह रहे हैं कि बहुत जल्द हमारे वर्ग की